Kavitanjali by Dr Ram Lakhan Prasad - HTML preview

PLEASE NOTE: This is an HTML preview only and some elements such as links or page numbers may be incorrect.
Download the book in PDF, ePub, Kindle for a complete version.

समझ क समझ

अर्ने कवित ांजवि क रचते समय हम ने बहुत से इांस न क देख है

वकसी के बदन र्े विब स नहीां थे वकसी विब स में इांस न नहीां देख है

वकतने ि र्ग इस सांस र में क ई भी ह ि त ां क नहीां समझने ि िे हैं

विर वकतने त ऐसे हैं ज क ई भी जज्ब त क नहीां समझ सकतें हैं

ये त अर्नी अर्नी ही समझ है की क ई क र क र्गज़ भी समझत है

र्र वकतने यह ूँ ऐसे भी हैं ज श यद मेरे रचन ओां क भी न समझते हैं

समझ समझ कर समझ क समझ समझ समझन भी एक समझ है

समझ समझ कर भी ज न समझे मेरे समझ में त िह न समझ ही है

इस वजांदर्गी में अर्गर तुम अकेिे ह जल्द ही प्य र करन सीख ि

िेवकन अर्गर प्य र कर विय त जल्द इजह र करन भी सीख ि

अर्गर ऐस कुछ भी नहीां कर सक त जीिन भर र न ही सीख ि

भि ह र्ग की ज़म ने के स थ चिते रह और यह ूँ जीन सीख ि

42

Image 29

43

कह ूँ अटक र्गय है यह मन?

मन बड़ ही चांचि है कभी भटक ज त है त कहीां अटक भी ज त है

कभी ब दि ां में अटक ज त है त कभी धरती र्र भी सटक ज त है

कभी अर्ने प्य रे ि र्ग ां क छय िेत है त कभी उनसे दयर ह ज त है

अक्सर खुिे आसम न में िहर त है और झयम झयम कर ज त भी है

च हे िर्ष प कड़ी धुर् ये मन चटकत और मटकत ही रहत है

च ूँदनी र त ां में खयब क्तखित है और अूँधेरी र त ां से डरने व्ही िर्गत है

इस तरह वदि वदम र्ग क बहि कर आसम न में ब दि ां में झयमत है

कभी अर्न ां क छयकर आत है त र्ुरे तन क खुश करत रहत है

एसे ही मेर मन भी हम रे घर आूँर्गन में चमकत खेित रहत है

इस जीिन में ज भी म नि जब अर्नी र्यरी क वशश ां से ज र िर्ग|त है त र्त्थर

भी वर्घि ज त है

मैंने सद से खुद से जीतने की वजद्द िर्ग रक्खी थी इसी विए मुझे खुद क

हर नेकी च हत रहत है

मैं इस दुवनय में उसकी क ई भीड़ में नहीां हूँ क्यांवक हम रे अांदर स रे ज़म ने क

ख़य ि भर रहत है

हमने ब ांसुरी से सीख थ एक नय सबक की ये वजांदर्गी के सीने में ि ख जखम

ह त भी र्गुनर्गुन त रहत है |

43

44

इस जीिन के ररश्े

म न की यह सांस र भी बड़ अजीब है र्र जब हमक यह र्हच न में

आज येर्गी

की एक वदन यह छ टी सी जीिन एक ऐसे मुक म र्र अर्ने आर्

र्हुूँच ज येर्गी

सभी द स्ती और र्ररि र के ररश्े वसिप हम रे अर्ने य द ां में ही रह

ज एांर्गी

इतन जरर ह र्ग की हर ब त और ह ि त उन सबकी हमक य द

वदि येंर्गी

तब हम य त हसेंर्गे य विर र येंर्गे और तब हम री ये आूँखें नम ह

ज एांर्गी

विर च हे दफ्तर ह य घर आूँर्गन ह उनकी सभी अच्छे करम नज़र

आएूँर्गी

कुछ भी ह यह जीिन चित रहेर्ग र्र र्ैसे कम और खचे ज्य द ह

ज एांर्गी

च हे बजट कर य बे वफ़क्र खचप कर यह वजांदर्गी की र्ग डी चिती ही

ज येर्गी

इस विए य र जीि इस वजांदर्गी के हर र्ि क खयब खुि के नहीां त

र्छत ि र्गे

इस छ टी सी जीिन में द स्त और र्ररि र बड़े बहुमयल्य हैं सब क

छ ड़ ज ओर्गे

तब हम सब क यह वफ़क्र िर्गेर्गी की इस वजांदर्गी के ि र्ि दुब र

नही ां आएांर्गे

र्र तब र्छत ए क् ह र्ग जब हम रे जीिन के सब सुख सांत र् ही

वबर्गड़ ज एांर्गे

जब इस छ टे से जीिन में अर्ने सभी ररश् ां क बरकर र रख कर

चिते ज ओर्गे

जीिन जह ूँ खुवशय ां से भरी रहेर्गी िहीूँ इस सांस र में तुम खयब मजे भी

उठ ओर्गे

44

Image 30

45

इस वजांदर्गी क कौन च हत है?

हमने इस वजांदर्गी क चिते, दौड़ते, हूँसते, र ते र्ग ते और चमकते भी देख है

कई ब र इसक खुिे सडक ां र्र रेंर्गते हुए भीख म ूँर्गते और वचल्ल ते देख है

मैं ने इस वजांदर्गी क न ज ने वदन में वकतने सुनहरे सर्न क देखते र् य है

जब सर्ने सच नहीां ह ते त इस वजांदर्गी क तड़र्ते रुदन करते भी देख है

मैं ने इस वजांदर्गी क जांर्गि ां में स ते भी देख है भयख से तड़र्ते भी देख है

मैं ने इस वजांदर्गी क कड़े धयर् में अर्ने नांर्गे र् िां चिते और रेंर्गते भी देख है

केिि एक ही टुकड़ र टी के विए इसक अर्न ां से िड़ते झर्गड़ते देख है

िेवकन जब भी इस वजांदर्गी क मैं ने म ूँ के र्ग द में सुख के नीांद स ते देख है

तरस ख य है उनके विए वजनक म ूँ की र्ग द के विए अक्सर तरसते देख है

बहुत खयब र्ते की ब त है की मैं ने इस वजांदर्गी क सस्त सौद ह ते भी देख है

िही वजांदर्गी सिि ह र्गी जब वकसी ने इसक वकसी की भयख वमट ते देख है

हम ने कहीां भीड़ में कई ब र इस वजांदर्गी क तनह और उद स भी देख है

बड़ी तकिीि हुयी मुझे जब भी मैं ने अर्ने ह ांथ ां से इस क जन ज उठ य है

अब इस वजांदर्गी से मैं र्हच न कर ियूँ िरन इस क कब कह ूँ कौन च हत है

मैं यह म नत आय हूँ की ज ि र्ग हम रे बुरे िक़्त में भी हम रे स थ खड़े रहतें हैं

सच ब त यही है की उनसे ज्य द सर्ग ररश्ेद र और क ई भी नहीां ह सकत है

वकतने शब् ां की खुिी वकत ब है वजांदर्गी हम रे खय ि और स ूँस ां क वहस ब है

कुछ जररतें र्यरी हुयी कुछ ख्व वहशें अधयरी इस बुढ़ र्े में इन्ीां सब क जि ब है

45

46

अब हम री भी कुछ सुनिीज मेरे

Find Your Next Great Read

Describe what you're looking for in as much detail as you'd like.
Our AI reads your request and finds the best matching books for you.

Showing results for ""

Popular searches:

Romance Mystery & Thriller Self-Help Sci-Fi Business