Kavitanjali by Dr Ram Lakhan Prasad - HTML preview

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मजबयत बन त रह

इस विए यह वजांदर्गी ययूँ ही चिती रही तथ इस सिर क हमने खयब

मज िेत रह

सीधी स धी सी रही है हम री यह वजांदर्गी क ई र्ेंच,कुच ि य र्गम हम

नही ां रखते थे

जब भी खुश ह ते थे त हांस िेते थे दुुः ख ददप के समय र भी िेते थे

स च न करते थे

खुिी वकत ब के तरह मैं रहत थ वकसी से क ई र्द पद री नहीां

वमिजुि के रहते थे

ज भी जबभी जह ूँभी कहन ह त थ सीधे कह देते थे वदि में क ई

भरम न रखते थे

च हे दुुः ख ददप वकसी क ह छिक ज ती थी आूँखें हम री एसी ही

स्व भ ि रखते थे

दुश्मनी,निरत,वर्गि य क ई वशक यत नहीां करते थे वदि वदम र्ग

क श ांत रखते थे

खुश ह िेते थे दयसर ां के ख़ुशी देख कर और बेवदिी त कभी भयि

कर भी न करते थे

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इस वजांदर्गी क कैसे जीन है?

हमक यह छ टी सी वजांदर्गी वमिी है त हम क हांस कर जीन है

अब हमें अर्ने सभी ग़म ां क भुि कर र्यरे वदि िर्ग कर जीन है

म न विय की उद सी में क् रख है त अब मुस्कुर के जीन है

अर्ने विए त खयब वजए हैं हम अब त अर्न ां के विए भी जीन है

ययूँ करने क वदि च हत रहत है क्यांवकअब िक़्त के स थ ही जीन है

ऐसी आदत अच्छी है जैस भी ह र्गुजर ज त है बस ऐसे ही जीन है

बचर्न में हम त ज र से र ते थे ब िते थे अर्नी र्सांद र् के जीन है

बयढ़े ह र्गए त चुर्के से र िेते हैं ब िते अर्नी र्सांद छुर् के जीन है

अब त अर्ने वजांदर्गी के सभी उिझन ां क सही जि ब ढयांढ कर ही

जीन है

अब कर सके हर अर्ने ददप कम उस दि क ढयांढ के सुख श ांवत से

जीन है

िक़्त के मजबयर ह ि त से ि च र हूँ त अब जीने क बह न ढयांढ के

जीन है

अब हर र ज ऐसी र ह ां क ढयांढत हूँ ज हमें बत दे के कैसे आर म से

जीन है

यह दुवनय ां बड़ी जीब ह ती ज ती है जह ूँ सभी ि र्ग ां क सांभि कर

जीन है

ि र्ग कीमत से नहीां र्र वकस्मत से क्तखिते हैं यह भी हमक ज नके

जीन है

अर्ने मन की विखत हूँ त मेरे शब् रठ ज ते हैं र्र विर भी हमें

जीन है

अर्गर अच् भी विखत हूँ त अर्ने र् ठक रठ ज ते हैं विर भी हमें

जीन है

अर्गर हम अर्ने वशक्ष से र्हिे सांस्क र र्र ध्य न दें तब िह अच्छ

जीन है

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अर्गर हम व्य र् र से र्हिे अच्छे व्य ह र वदख एां त ि बहुत अच्छ

जीन है

भर्गि न् से र्हिे अर्ने म त वर्त क र्हच न िे त ि भी एक

अच्छ जीन है

हम रे इन ब त ां र्र जर भी ध्य न देदें त स रे कवठन ई से दयर ह के

जीन है

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प्य र के श िे क

विर भड़क दे

अर्ने वजांदर्गी के रांर्गमांच र्र हम वनकि र्ड़े हैं

ि र्ग ां के विए अब र ज एक ग़ज़ि छेड़ देतें हैं

अर्ने चेहरे र्र एक सजी सी मुस्क न ि ते हैं

अर्ने जीिन के ि र्ुर ने मांवज़ि क ढयांढते हैं

ख जत हूँ उनक सभी जर्गह र्र नहीां र् तें हैं

र्श्च त र् के वसि और कुछ भी नहीां भ तें हैं

भिे द आत्म क वमिन क समझ ज ते हैं

विर भी उनकी आने की र ह देखते रहते हैं

मेर प्य र एक आर्ग है अब यही हम कहते हैं

मेरे प्य र के श िे ही वदि में र्गमी भरते हैं

सयरज की तरह ये प्य र चमकत रहत है

च ूँद की च ांदनी क देखन च हत है

दुि है रब से की द आत्म ओां क वमि दे

िही र्ुर ने प्य र के श िे क विर भड़क दे

मेर जनम वनि स

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अभी ह र नही ां हूँ मैं

ि हम रे र्गुरुजन ये हम री विनती ही विर मुझे स्कयि बुि न

हम क कुछ ऐसे नए ज्ञ न ध्य न वदि न ये ब त भयि मत ज न

ऐस जतन करन की हम रे क म के विए एक नय र्हच न ह

मैं अर्न हर कदम ऐसे चियूँ की यह ूँ मेरे सुनहरे वनश न बने ह

इस वजांदर्गी में हर क ई त वकसी तरह से अर्न वदन क टतें हैं

मुझे ये वजांदर्गी इस कदर से जीन है की मेरी भी वमश ि बने हैं

मुझ जैसे र्ररांद ां क मांवज़ि वमिेर्गी यकीनन मेर र्र ब ित है

इस जीिन में ख म श रहन च हत हूँ मेरे हुनर यही कहत है

मैं म नत हूँ की मैद न में ह र व्यक्ति विर से जीत सकत है

र्र ज व्यक्ति मन से ह र ह ि त कभी भी नहीां जीत सकत है

मै कभी अर्ने र्ररक्तततवथय ां के ह ांथ ां क कटर्ुतिी नहीां बनयूँर्ग

मैं समझत हूँ की मैं अर्ने सभी ह ि त बदिने क दम रखयूँर्ग

मैं ज नत हूँ की र ने ध ने से यह ूँ कुछ भी र् य नहीां ज त है

वकसी अर्ने प्य रे क ख देने से उनक भुि य नहीां ज त है

अर्नी वजांदर्गी क बदिने के विए यह ूँ सब क िक़्त वमित है

वजांदर्गी दुब र नहीां वमिती िक़्त बदिने के विए य द रखन है

वजांदर्गी क यही ििसि है न ख्व वहश खुशी क न र्गम क है

इस छ टे से वजांदर्गी में िक़्त के स थ २ बहुत कुछ बदि ज तें है

अर्ने ि र्ग भी,ररश्े भी,र स्ते भी,एहस स भी हम भी बदिते हैं

आर म करने के विए तुम मेहनत मत कर इस छ टीसी जीिन में

जीिन में मेहनत इतनी कर की जीिन सुखी ह आर म करने में

मैं कभी नहीां वफ़क्र वकय की मेरे वजांदर्गी के भविष्य में क् ह र्ग

मैं ने यह भी नहीां स च की हम रे वजांदर्गी में कभी कुछ बुर ह र्ग

मैं बेधड़क बढ़त रह अर्ने मांवज़ि ां की ख ज में यही मैंने च ह थ

च हे हमक कुछ वमि य न वमि र्र एक नय तजुब प त वमि थ

ये मेरी वजांदर्गी है वजसमे हम क सद एक छ ट स जह न बन न थ

कभी र न त कभी हांसन थ त कभी ख कर भी सब कुछ र् न थ

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हम रे र स्ते कह ूँ ख़तम हुए इस जीिन के सिर में नज़र नहीां आये थे

हम रे सभी मांवज़िें त िहीूँ रहीां जह ूँ हम रे सब ख्व वहशें रुक र्गए थे

स चत हूँ की अब थ ड़ स और वनखर ज ियां अर्ने इन र ह ां में

अर्ने वजांदर्गी से कह दयूँ की थ ड़ रुक ज ए अभी ह र नहीां हूँ मैं

हर ह र हम रे जीिन में एक विर म थ जीिन मह सांग्र म थ

,मैं वति-वति वमटत रह र्र दय की भीख मैं विय नही ां थ

मैं स्मृवत सुखद प्रहर ां के विए घर आूँर्गन के विए ही डट रह

यह ज न ि की मैं स रे सांस र की सम्पवतय ां क च हत रह

क् मेरे ह र में क् जीत में वकांवचत नहीां हुि थ भयभीत मैं

सांधर्षप र्थ र्र ज वमिे िह भी सही यह भी सही म न थ मैं

अर्ने िघुत क ध्य न नहीां थ मांवज़ि की ख ज में चित रह

अर्ने हृदय िेदन क समेट के मैं वनस्व थप बेधड़क बढ़त रह

च हे मेरे हृदय में त र् ह च हे मुझे क ईअवभश र् मैं बढ़त रह

खयब वकय अर्न कतपव्य अर्ने र्थ से वकांतु कभी नहीां भर्ग थ

हर ह र हम रे जीिन में एक विर म थ एक जीिन मह सांग्र म थ

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