Kavitanjali by Dr Ram Lakhan Prasad - HTML preview
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मत करन य र
इस दुवनय ां में वहम्मत ि िे चिते हैं अकेिे ही और उनके र्ीछे मेिे ह
ज ते हैं य र
अर्ने तकदीर की कर र्गे इांतज़ र तब यह वजांदर्गी में बहुत झमेिे
वमिते रहेंर्गे य र
21
मैं यह ूँ रहूँ य न रहूँ मेर र्त और मेरे सभी रचन एूँ त यहीां रह
ज एांर्गे मेरे य र ां
मैं ने यह ूँ ब य है बहुत बीज अर्ने सम्वेदन ओां क उनक सीांचते
रहन मेरे य र
एक न एक वदन ियि भी क्तखिेंर्गे और मीठ िि भी वमि ज एांर्गे
तुमक मेरे य र
इस जीिन क वसय सत के च ि ां से दयर रखन अर्ने क म से क म
